Interesting Facts What is Radar रडार क्या है

What is Radar

रडार एक प्रणाली है जिसका उपयोग गतिमान वस्तुओं जैसे वाहन, वायुयान, जलयान. आदि की गति, दिशा, उचाई, दूरी का पता लगाने के लिये किया जाता है।

रडार में रेडियो तरंगों ओर सूक्ष्म तरंगों का उपयोग किया जाता है।

इसका उपयोग मौसम की जानकारी, ओर वायु मंडल में हुए बदलावों का पता लगाने के लिये किया जाता है।

रडार
राडार

Radar का प्रयोग सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की नोसेना द्वारा 1940 में पनडुब्बीयो का पता लगाने के लिये किया गया।

Radar meaning ओर Radar full form in hindi

Radar का मीनिंग है वह यंत्र जो रेडियो तरंगों का सही क्रम मे पता लगाएं radar कहा जा सकता है।

Radar का full form है Radio Detection And Ranging.  रेडियो डिटेक्शन ऐण्ड रेंजिंग 

Radar का आविष्कार किसने किया

रॉबर्ट वाटसन वाट्ट ने radar का आविष्कार किया था।

रॉबर्ट वाटसन वाट्ट को राडार के नाम से भी जाना जाता है।

रॉबर्ट ने अपने कैरियर की सुरुवात रेडियो सिंगन के साथ कि 1920 में अपने आफिस में उन्होंने Thunderstorms का पता गलने के लिये रेडियो सिंग्नल्स का प्रयोग किया आगे चलके 1935 में अर्नाल्ड फेड्रिक के साथ उन्होंने Aircraft वायुयान का पता लगने का परीक्षण किया और सफल भी रहे।

Radar किस सिद्धांत पर काम करता है।

आसान भाषा में कहा जाए तो रडार के 2 भाग होते है ट्रांसमीटर ओर रिसीवर, रडार ट्रांसमीटर की सहायता से रेडियो तरंगे भेजता है इनकी रेडियो तरंगों की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकेण्ड होती है, कुछ अंतराल के लिये ये तरंग भेजी जाती है।

 जैसे है रेडियों तरंग किसी वस्तु से टकराकर वापस लोटती है। रिसीवर की सहायता से उसको रिसीव किया जाता है, ओर उस वस्तु की गति, दूरी, उचाई, ओर आकर का पता किया जाता है।

Types of Radar रडार के प्रकार

Radar मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है

पल्स राडार ओर कॉन्टिनुस वेव राडार

पल्स राडार  पल्स सिग्नल के साथ काम करने वाले रडार को पल्स रडार कहा जाता है।

पल्स राडार को दो भागों में बांटा जाता है

बेसिस पल्स राडार ओर मूविंग टारगेट इंडीकेटर राडार

पल्स रडार बेसिस सतत वस्तुओं को डिटेक्ट करने के लिये उसे किया जाता है, 

ओर मूविंग टारगेट इंडिकेटर राडार जैसा कि नाम से ही समझ आता है 

गतिमान वस्तुओं को डिटेक्ट करने के लिये इसका प्रोयग किया जाता है।

कॉन्टिनुस वेव रडार  यह राडार कॉन्टिनुस वेव टारगेट की तरह भेजता है

 इसके दो प्रकार होते है।

रडार
रडार

Modulated wave radar ओर unmodulated wave radar

रडार तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा प्रणाली योगी के लिए किया जाता है

 द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही इस तकनीक का इस्तेमाल तेजी से किया जाने लगा वर्तमान में कई राष्ट्र अपनी सुरक्षा को कड़ी करने के लिए रडार तकनीक का इस्तेमाल करते हैं 

सामान्य तौर पर देखा जाए तो मौसम विभाग के द्वारा मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है

रडार से निकलने वाली रेडियो तरंगे 300000 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से किसी भी वस्तु से टकराती है।

वह परावर्तित होकर रडार के रिसीवर द्वारा कैच की जाती है तत्पश्चात सामने वाली वस्तु की स्थिति दूरी गति ऊंचाई अधिका पता लगाना काफी आसान हो जाता है राडार के समान ही तकनीक पर सोनार भी कार्य करता है। चलिए जानते है सोनार क्या है!

Sonar in hindi

जैसे रडार के बारे में आपने जाना ठीक वैसे ही पानी के अंदर एक पनडुब्बी का दूसरी पनडुब्बी द्वारा पता लगाने की तकनीक को सोनार की तकनीक कहा जाता है

सोनार जी सिद्धांत पर काम करती है 

वह रडार का सिद्धांत है परंतु इसमें रेडियो तरंगों के जगह ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है 

एक पनडुब्बी द्वारा पानी के अंदर ध्वनि तरंगे भेज कर रिसीवर द्वारा टकराकर आने वाली ध्वनि तरंगों का विश्लेषण करके सामने वाली वस्तु या अन्य पनडुब्बी का अंदाजा लगाया जा सकता है

सोनार का आविष्कार पॉललेंग्विन द्वारा किया गया।

रडार प्रणाली किस जानवर में पाई जाती है

रेडियो तरंगों का प्रयोग शार्क, इल, ओर प्लैटीपुस बत्तखमुँह आदि जलीय जीव भी करते है

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *